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महागणपती श्री अण्णा गणपती गणानां त्वा गणपतिं हवामहे
कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् ।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत
आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥
Gannaanaam Tvaa Ganna-Patim Havaamahe
Kavim Kaviinaam-Upama-Shravastamam |
Jyessttha-Raajam Brahmannaam Brahmannaspata
Aa Nah Shrnnvan-Uutibhih Siida Saadanam || Meaning:
(This Mantra of Rig Veda 2.23.1 is addressed to Brihaspati / Brahmanaspati)
1: Among the Ganas (Group of Prayers), to You Who are Ganapati (Lord of Prayers), we Offer our Sacrificial Oblations,
2: You are the Wisdom of the Wise and Uppermost in Glory,
3: You are the foremost King of Prayers, presiding as the Lord of the Prayers (Brahmanaspati),
4: Please come to us by Listening to our invocation and be Present in the Seat of this Sacred Sacrificial Altar (to charge our Prayers with Your Power and Wisdom). #annaganapati #mahaganapati#guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi  #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik  #siddhivinayak#temples#ganesh#shiva#vishnu# #temple#templesofindia
महागणपती "श्री अण्णा गणपती" गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥ Gannaanaam Tvaa Ganna-Patim Havaamahe Kavim Kaviinaam-Upama-Shravastamam | Jyessttha-Raajam Brahmannaam Brahmannaspata Aa Nah Shrnnvan-Uutibhih Siida Saadanam || Meaning: (This Mantra of Rig Veda 2.23.1 is addressed to Brihaspati / Brahmanaspati) 1: Among the Ganas (Group of Prayers), to You Who are Ganapati (Lord of Prayers), we Offer our Sacrificial Oblations, 2: You are the Wisdom of the Wise and Uppermost in Glory, 3: You are the foremost King of Prayers, presiding as the Lord of the Prayers (Brahmanaspati), 4: Please come to us by Listening to our invocation and be Present in the Seat of this Sacred Sacrificial Altar (to charge our Prayers with Your Power and Wisdom). #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia
संकष्ठी चतुर्थी के दिन करें गणेश जी की पूजा, होगी हर मनोकामना 
भगवान श्री अन्ना गणपति, दत्ता योगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराजी के अधिष्ठान से निर्मित नासिक महाराष्ट्र में स्थापित श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्धपीठम
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि के बारें में। आज  कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है । शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए बड़ा ही विशेष माना जाता है और आज के दिन तो संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। अत: आज बुधवार के दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान श्री गणेश की उपासना बड़ी ही फलदायी
प्रतियोगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराज पीठाधीश्वर श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्ध पीठ , नासिक महाराष्ट्र केअनुसार श्री गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना जाता है । इस हिसाब से हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बस फर्क केवल इतना है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । कहते हैं कि जो व्यक्ति आज के दिन व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है ।

संकष्ठी चतुर्थी व्रत का पारण
आपको बता दूं कि ये व्रत सुबह से लेकर शाम को चन्द्रोदय होने तक किया जाता है और चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है । जानकारी के लिये आपको बता दूं कि चन्द्रोदय आज रात 10 बजकर 33 मिनट पर होगा ।

#annaganapati #mahaganapati#guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi  #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik  #siddhivinayak#temples#ganesh#shiva#vishnu# #temple#templesofindia
संकष्ठी चतुर्थी के दिन करें गणेश जी की पूजा, होगी हर मनोकामना भगवान श्री अन्ना गणपति, दत्ता योगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराजी के अधिष्ठान से निर्मित नासिक महाराष्ट्र में स्थापित श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्धपीठम संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि के बारें में। आज कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है । शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए बड़ा ही विशेष माना जाता है और आज के दिन तो संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। अत: आज बुधवार के दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान श्री गणेश की उपासना बड़ी ही फलदायी प्रतियोगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराज पीठाधीश्वर श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्ध पीठ , नासिक महाराष्ट्र केअनुसार श्री गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना जाता है । इस हिसाब से हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बस फर्क केवल इतना है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । कहते हैं कि जो व्यक्ति आज के दिन व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है । संकष्ठी चतुर्थी व्रत का पारण आपको बता दूं कि ये व्रत सुबह से लेकर शाम को चन्द्रोदय होने तक किया जाता है और चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है । जानकारी के लिये आपको बता दूं कि चन्द्रोदय आज रात 10 बजकर 33 मिनट पर होगा । #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia
संकष्ठी चतुर्थी के दिन करें गणेश जी की पूजा, होगी हर मनोकामना 
भगवान श्री अन्ना गणपति, संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि के बारें में, दत्ता योगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराजी के अधिष्ठान से निर्मित  श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्धपीठम,नासिक महाराष्ट्र में स्थापित

आज  कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है । शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए बड़ा ही विशेष माना जाता है और आज के दिन तो संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। अत: आज बुधवार के दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान श्री गणेश की उपासना बड़ी ही फलदायी
प्रतियोगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराज पीठाधीश्वर श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्ध पीठ , नासिक महाराष्ट्र केअनुसार श्री गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना जाता है । इस हिसाब से हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बस फर्क केवल इतना है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । कहते हैं कि जो व्यक्ति आज के दिन व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है ।

संकष्ठी चतुर्थी व्रत का पारण
आपको बता दूं कि ये व्रत सुबह से लेकर शाम को चन्द्रोदय होने तक किया जाता है और चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है । जानकारी के लिये आपको बता दूं कि चन्द्रोदय आज रात 10 बजकर 33 मिनट पर होगा ।

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संकष्ठी चतुर्थी के दिन करें गणेश जी की पूजा, होगी हर मनोकामना भगवान श्री अन्ना गणपति, संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि के बारें में, दत्ता योगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराजी के अधिष्ठान से निर्मित श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्धपीठम,नासिक महाराष्ट्र में स्थापित आज कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है । शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए बड़ा ही विशेष माना जाता है और आज के दिन तो संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। अत: आज बुधवार के दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान श्री गणेश की उपासना बड़ी ही फलदायी प्रतियोगी स्वामी श्री अन्ना गुरु जी महाराज पीठाधीश्वर श्री अन्ना गणपति नवग्रह सिद्ध पीठ , नासिक महाराष्ट्र केअनुसार श्री गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना जाता है । इस हिसाब से हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बस फर्क केवल इतना है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं । इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है । कहते हैं कि जो व्यक्ति आज के दिन व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है । संकष्ठी चतुर्थी व्रत का पारण आपको बता दूं कि ये व्रत सुबह से लेकर शाम को चन्द्रोदय होने तक किया जाता है और चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है । जानकारी के लिये आपको बता दूं कि चन्द्रोदय आज रात 10 बजकर 33 मिनट पर होगा । #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia
SUNDAY DEVOTED TO SURYA NARAYANA seek the Blessings of the DIVINE Surya Narayan the god of health & fame 
श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।
शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम् ।।१।। याज्ञवल्क्यजी बोले- हे मुनिशिरोमणे! सूर्य के शुभ कवच को सुनो, जो शरीर को आरोग्य देने वाला है और सब सौभाग्य को देने वाला है। देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्रमेततु दीरयेत् ।।२।। चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकर कुंडल वाले सहस्र किरण रूपी इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए ।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।
नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।।३।। मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें। ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।
जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।।४।। मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित, जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें। स्कन्धौ प्रभाकर: पातु वक्ष: पातु जनप्रिय:।
पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वांगसकलेश्वर:।।५।। स्कन्धों की रक्षा प्रभाकर और वक्ष की रक्षा जनप्रिय करें। पैरों की द्वादशात्मा (12 सूर्य रूप) और सब अंगों की वे सकलेश्वर रूप रक्षा करें। सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।।६।। सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं। सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।
सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।।७।। स्नान करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह वह रोग मुक्त, दीर्घायु, सुखी व पुष्ट होता है। ।। इति श्री माद्याज्ञवल्क्यमुनिविरचितं सूर्यकवचस्तोत्रं संपूर्णं ।। #annaganapati #mahaganapati#guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi  #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik  #siddhivinayak#temples#ganesh#shiva#vishnu# #temple#templesofindia
SUNDAY DEVOTED TO "SURYA NARAYANA" seek the Blessings of the DIVINE Surya Narayan the god of health & fame श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्। शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम् ।।१।। याज्ञवल्क्यजी बोले- हे मुनिशिरोमणे! सूर्य के शुभ कवच को सुनो, जो शरीर को आरोग्य देने वाला है और सब सौभाग्य को देने वाला है। देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम। ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्रमेततु दीरयेत् ।।२।। चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकर कुंडल वाले सहस्र किरण रूपी इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए । शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:। नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।।३।। मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें। ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:। जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।।४।। मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित, जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें। स्कन्धौ प्रभाकर: पातु वक्ष: पातु जनप्रिय:। पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वांगसकलेश्वर:।।५।। स्कन्धों की रक्षा प्रभाकर और वक्ष की रक्षा जनप्रिय करें। पैरों की द्वादशात्मा (12 सूर्य रूप) और सब अंगों की वे सकलेश्वर रूप रक्षा करें। सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके। दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।।६।। सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं। सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:। सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।।७।। स्नान करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह वह रोग मुक्त, दीर्घायु, सुखी व पुष्ट होता है। ।। इति श्री माद्याज्ञवल्क्यमुनिविरचितं सूर्यकवचस्तोत्रं संपूर्णं ।। #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia
Sunday Devoted to 
Navgraha Kshetrapal (Protector)
Lord Kaal Bhairava कालभैरव नवग्रहोंका क्षेत्रपाल

नमो भूतनाथं नमो प्रेतनाथं
नमः कालकालं नमः रुद्रमालम् ।
नमः कालिकाप्रेमलोलं करालं
नमो भैरवं  नवग्रह क्षेत्रपालम् ॥

मूल मंत्र- ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं। #annaganapati #mahaganapati#guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi  #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik  #siddhivinayak#temples#ganesh#shiva#vishnu# #temple#templesofindia
Sunday Devoted to Navgraha Kshetrapal (Protector) Lord Kaal Bhairava "कालभैरव नवग्रहोंका क्षेत्रपाल" नमो भूतनाथं नमो प्रेतनाथं नमः कालकालं नमः रुद्रमालम् । नमः कालिकाप्रेमलोलं करालं नमो भैरवं नवग्रह क्षेत्रपालम् ॥ मूल मंत्र- 'ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं'। #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
#annaganapati #mahaganapati#guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi  #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik  #siddhivinayak#temples#ganesh#shiva#vishnu# #temple#templesofindia
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा #annaganapati #mahaganapati #guruji #gurudev #jaigurudev #navgrahasiddhapeetham #navgrahanasik #dattayogi #annaguruji #maa #maharashtra #nasik #nashik #siddhivinayak #temples #ganesh #shiva #vishnu# #temple #templesofindia